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Saturday, May 4, 2019

भारत में ई-कॉमर्स

Ashok Pradhan     May 04, 2019     No comments

ई-कॉमर्स क्या है?

  • दरअसल, इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स को ही शॉर्ट फॉर्म में ई-कॉमर्स कहा जाता है। यह ऑनलाइन व्यापार करने का एक तरीका है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के द्वारा इंटरनेट के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-बिक्री की जाती है।
  • आज के समय में ई-कॉमर्स के लिये इंटरनेट सबसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। यह बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ उपभोक्ता और व्यापार के लिये कई अवसर भी प्रस्तुत करता है। इसके उपयोग से उपभोक्ताओं के लिये समय और दूरी जैसी बाधाएँ बहुत मायने नहीं रखती हैं।
  • इसमें कंप्यूटर, इंटरनेट नेटवर्क, वर्ल्डवाइड वेव और ई-मेल को उपयोग में लाकर व्यापारिक क्रियाकलापों को संचालित किया जाता है।
यहाँ सवाल यह उठता है कि ई-कॉमर्स में उपभोक्ता यानी कि कंज्यूमर और बिज़नेसमैन के बीच संबंधों की प्रक्रिया कैसे सुचारु रूप से संचालित होती है? आपको बता दें कि पॉपुलर तरीके से इनके बीच कई प्रकार के मॉडल कार्य करते हैं जिसमें कुछ प्रमुख हैं।
  • इनमें पहला है B2B यानी कि बिज़नेस टू बिज़नेस मॉडल। इसके अंतर्गत एक कंपनी किसी दूसरी कंपनी या फर्म को सामान बेचती है। इसके अंतर्गत वे कंपनियाँ या फर्म आते हैं जो खुद के प्रयोग के लिये सामान खरीदते हैं या फिर कच्चा माल खरीदकर उससे सामान तैयार करते हैं।
  • दूसरे प्रकार का मॉडल है B2C यानी कि बिज़नेस टू कंज्यूमर। इसके तहत कंज्यूमर किसी कंपनी से सीधे सामान खरीदता है।
  • इसी प्रकार तीसरे तरह का मॉडल है C2C यानी कि कंज्यूमर टू कंज्यूमर। इसके तहत कंज्यूमर सीधे कंज्यूमर से संपर्क करता है। इसमें कंपनियों की कोई भूमिका नहीं होती है।
  • चौथे प्रकार का मॉडल है C2B यानी कि कंज्यूमर टू बिज़नेस। इसमें कंपनी सीधे कंज्यूमर से संपर्क करती है।
  • इसी तरह बाज़ार में बढ़ती सामानों की मांग और उसकी आपूर्ति को देखते हुए ई-कॉमर्स की ऑनलाइन शॉपिंग में दो तरह के मॉडल अब ज़्यादा पॉपुलर हो रहे हैं जिनमें पहला है- मार्केट प्लेस मॉडल| इस मॉडल में ऑनलाइन कंपनियाँ केवल एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा देती हैं, जहाँ से कंज्यूमर अपनी जरूरत के मुताबिक सामान खरीद सकता है। जैसे कि अमेजन, स्नैपडील, फ्लिपकार्ट इत्यादि। इसमें अन्य ऑनलाइन कंपनियों का कोई रोल नहीं होता है। इसी प्रकार दूसरा है इन्वेंटरी मॉडल| इसके तहत ऑनलाइन कंपनियाँ इस प्लेटफॉर्म पर अपनी कंपनी के द्वारा सामान बेचती हैं। इसमें अलीबाबा का नाम सबसे ऊपर आता है।   

ई-कॉमर्स के लाभ

  • गौरतलब है कि ई-कॉमर्स के ज़रिये सामान सीधे उपभोक्ता को प्राप्त होता है। इससे बिचौलियों की भूमिका तो समाप्त होती ही है, सामान भी सस्ता मिलता है। इससे बाज़ार में भी प्रतिस्पर्द्धा बनी रहती है और ग्राहक बाज़ार में उपलब्ध सामानों की तुलना भी कर पाता है जिसके कारण ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाला सामान मिल पाता है।
  • एक तरफ ऑनलाइन शॉपिंग में ग्राहकों की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच आसान हो जाती है तो वहीं दूसरी तरफ, ग्राहकों का समय भी बचता है।
  • ई-कॉमर्स के ज़रिये छोटे तथा मझोले उद्यमियों को आसानी से एक प्लेटफॉर्म मिल जाता है जहाँ वे अपने सामान को बेच पाते हैं। साथ ही इसके माध्यम से ग्राहकों को कोई भी स्पेसिफिक प्रोडक्ट आसानी से मिल सकता है।
  • ई-कॉमर्स के ज़रिये परिवहन के क्षेत्र में भी सुविधाएँ बढ़ी हैं, जैसे ओला और ऊबर की सुविधा। इसके अलावा मेडिकल, रिटेल, बैंकिंग, शिक्षा, मनोरंजन और होम सर्विस जैसी सुविधाएँ ऑनलाइन होने से लोगों की सहूलियतें बढ़ी हैं। इसलिये बिज़नेस की दृष्टि से ई-कॉमर्स काफी महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है।
  • ई-कॉमर्स के आने से विज्ञापनों पर होने वाले बेतहाशा खर्च में भी कमी देखी गई है| इससे भी सामान की कीमतों में कमी आती है।
  • इसी तरह एक ओर, जहाँ शो-रूम और गोदामों के खर्चों में कमी आती है, तो वहीं दूसरी ओर, नए बाज़ार की संभावनाएँ भी  बढ़ती हैं। साथ ही इससे वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति में तीव्रता आती है और ग्राहकों की संतुष्टि का ध्यान भी रखा जाता है।
इन्हीं तमाम खूबियों की वज़ह से ई-कॉमर्स से अनेक लाभ मिलते हैं किन्तु इससे कुछ समस्याएँ भी उत्पन्न होती हैं जिनको समझना ज़रूरी है।

चुनौतियाँ 

  • गौरतलब है कि ऑनलाइन शॉपिंग को लेकर कंज्यूमर्स के मन में हमेशा संदेह का भाव बना रहता है कि उन्होंने जो प्रोडक्ट खरीदा है वह सही होगा भी या नहीं। इस वर्ष सरकार को ई-कॉमर्स से जुड़ी बहुत सी वेबसाइट्स के खिलाफ शिकायतें भी मिलीं, जिनमें कंज्यूमर का कहना था कि उन्होंने जो सामान बुक किया था उसके बदले उन्हें किसी और सामान की डिलीवरी की गई या फिर वह सामान खराब था।
  • इसी तरह कई बार लोगों की शिकायतें रहती हैं कि अब वे कहाँ इसके खिलाफ शिकायत करें।
  • एक तरफ, जहाँ इसको लेकर किसी ठोस कानून का अभाव है, तो वहीँ दूसरी तरफ, लोगों में जागरूकता की कमी भी दिखती है।
  • स्पष्ट नियम और कानून न होने की वज़ह से छोटे और मझोले उद्योगों के सामने कुछ चुनौतियाँ भी उत्पन्न हो सकती हैं| वे बाज़ार की इस अंधी दौड़ में इन बड़ी-बड़ी कंपनियों का सामना नहीं कर पाएंगे। ऐसे में बेरोज़गारी के बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
  • ऑनलाइन शॉपिंग के मामले में सुरक्षा को लेकर लोगों ने पहले से ही चिंता जाहिर की है| उनका मानना है कि ये कंपनियाँ उनका डेटा कलेक्ट कर रही हैं, जो कि चिंता की बात है।
  • इसी प्रकार ऑनलाइन शॉपिंग में लोगों के क्रेडिट या डेबिट कार्ड की क्लोनिंग कर उनके बैंक बैलेंस से रुपए निकाल लेना या फिर हैकरों के द्वारा बैंकिंग डेटा की हैकिंग कर लेना भी एक समस्या है। इतना ही नहीं, ऑनलाइन शॉपिंग के क्षेत्र में कार्यरत कुछ बड़ी कंपनियाँ अब सामानों की डिलीवरी ड्रोन से करने का मन बना रही हैं, जिसको लेकर सरकार और लोगों के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिख रही हैं।

आगे की राह 

आज देश में ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़ा व्यापार करीब 25 अरब डॉलर का है। ऐसा अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में यह व्यापार करीब 200 अरब डॉलर का हो जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि इस क्षेत्र में इतनी तेज़ वृद्धि की आखिर वज़ह क्या है? आपको बता दें कि एक ओर, देश की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर, स्मार्टफोन और डेटा टैरिफ सस्ते हो रहे हैं। इतना ही नहीं, नेटवर्क कनेक्टिविटी में वृद्धि होना भी इसका एक कारण है। इन्हीं सब वज़हों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि यह देश के लिये एक अवसर है, किंतु समस्या यह है कि ई-कॉमर्स को लेकर देश में अब तक कोई स्पष्ट नीति नहीं है। इस क्षेत्र में बढ़ रही संभावनाओं के मद्देनज़र सरकार को एक स्पष्ट नीति लाने की ज़रूरत है। जिस तरह से ई-कॉमर्स क्षेत्र की कंपनियाँ लोगों का डेटा कलेक्ट कर रही हैं उससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। इधर डेटा सुरक्षा को लेकर गठित जस्टिस श्रीकृष्ण समिति ने भी सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कुल मिलाकर, अब समय आ गया है कि सरकार इस पर विचार करे। इसी प्रकार ई-कॉमर्स पर गठित टास्क फोर्स के द्वारा तैयार किये गए ड्राफ्ट में उल्लिखित बातों पर भी अमल किये जाने की ज़रूरत है।

Wednesday, May 1, 2019

RPSC (RAS) - प्रकृति एवं प्रक्रिया

Ashok Pradhan     May 01, 2019     No comments

परिचय (Introduction):

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान ज्यादातर अभ्यर्थी राज्य सिविल सेवा (पी.सी.एस.) परीक्षाओं में भी सम्मिलित होते हैं। यह प्रवृत्ति हिंदी भाषी राज्यों के अभ्यर्थियों में अधिकांशत: देखने को मिलती है। राजस्थान मूल के अभ्यर्थियों के अलावा सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों (विशेषकर हिंदी माध्यम) के लिये भी राजस्थान लोक सेवा आयोग (आर.पी.एस.सी.), अजमेर द्वारा आयोजित परीक्षाएँ मुख्य आकर्षण होती हैं। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रक्रिया में अंतर होने के बावजूद सिविल सेवा प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम के अध्ययन की ‘राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (संयुक्त  प्रतियोगी) परीक्षा’ में सार्थक भूमिका होती है, इसलिये सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र इन परीक्षाओं में भी सफल होते हैं।
आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएँ: 
  • राजस्थान में राज्य आधारित सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, न्यायिक एवं अन्य अधीनस्थ सेवाओं का आयोजन मुख्य रूप से राजस्थान लोक सेवा आयोग (आर.पी.एस.सी.), अजमेर द्वारा किया जाता है। 
  • इस आयोग द्वारा आयोजित सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षा ‘राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवा (संयुक्त प्रतियोगी) परीक्षा’ है, जिसे ‘आर.ए.एस.-आर.टी.एस.’ के नाम से भी जाना जाता है।  
आर.ए.एस.-आर.टी.एस. परीक्षा- प्रकृति एवं प्रक्रिया 
परीक्षा की प्रकृति: 
  • आयोग द्वारा आयोजित इन प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यत: क्रमवार तीन स्तर सम्मिलित हैं-
  1. प्रारंभिक परीक्षा – वस्तुनिष्ठ प्रकृति
  2.  
  3. मुख्य परीक्षा - वर्णनात्मक प्रकृति
  4.  
  5. साक्षात्कार - मौखिक
  • वर्ष 2013 से आर.पी.एस.सी. की प्रारम्भिक एवं मुख्य परीक्षा की प्रकृति एवं पाठ्यक्रम में महत्त्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इसका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है।  
परीक्षा की प्रक्रिया:
प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया:
  • सर्वप्रथम आयोग द्वारा इन परीक्षाओं से सम्बंधित विज्ञप्ति जारी की जाती है, उसके पश्चात ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होती है। फॉर्म भरने की प्रक्रिया सम्बंधित विस्तृत जानकारी ‘विज्ञप्ति’ के अंतर्गत ‘ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?’ शीर्षक में दी गयी है।   
  • विज्ञप्ति में उक्त परीक्षा से सम्बंधित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विवरण दिया गया होता है। अत: फॉर्म भरने से पहले इसका अध्ययन करना लाभदायक रहता है।     
  • फॉर्म भरने की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सामान्यतः 3 से 4 माह पश्चात प्रारम्भिक परीक्षा आयोजित की जाती है। 
  • यह प्रारंभिक परीक्षा एक ही दिन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केन्द्रों पर सम्पन्न होती है। 
  • आयोग द्वारा आयोजित इस प्रारम्भिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।  
  • प्रश्न से सम्बंधित इस चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दी गयी ओ.एम.आर. सीट में उसके सम्मुख दिये गए सम्बंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान पर काले या नीले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है।    
  • वर्ष 2013 में किये गए नवीन संशोधन के पश्चात आयोग की इस प्रारम्भिक परीक्षा में केवल एक प्रश्नपत्र सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान (वस्तुनिष्ठ) होता है (पूर्व में दो प्रश्नपत्र क्रमशः ‘सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान’ तथा अभ्यर्थी द्वारा विज्ञप्ति में दिये गये विषयों में से चयनित ‘एक वैकल्पिक विषय’ होते थे )। 
  • प्रारम्भिक परीक्षा के इस नवीन प्रश्नपत्र में प्रश्नों की कुल संख्या- 150 एवं अधिकतम अंक -200 निर्धारित हैं (सभी प्रश्नों के अंक समान होते हैं)। इसका उत्तर अभ्यर्थियों को आयोग द्वारा निर्धारित तीन घंटे की समय सीमा में देना होता है। 
  • आर.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इस परीक्षा में गलत उत्तर के लिये नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रत्येक गलत उत्तर के लिये एक तिहाई (1/3) अंक काटे जाते हैं।  
  • यदि अभ्यर्थी किसी प्रश्न का एक से अधिक उत्तर देता है, तो उस उत्तर को गलत माना जाएगा, यदि दिये गए उत्तरों में से एक सही भी उत्तर हो, फिर भी उस प्रश्न के लिये उपरोक्तानुसार ही उसी तरह का दण्ड दिया जाएगा। 
  • यदि अभ्यर्थी द्वारा कोई प्रश्न हल नहीं किया जाता है, अर्थात अभ्यर्थी द्वारा उत्तर नहीं दिया जाता है, तो उस प्रश्न के लिये  कोई दण्ड नहीं होगा।   
  • नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान होने के कारण इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये सामान्यत: 40-50% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, किन्तु कभी-कभी प्रश्नों के कठिनाई स्तर को देखते हुए यह प्रतिशत और भी कम हो सकता है।  
  • प्रश्नपत्र दो भाषाओं (हिंदी एवं अंग्रेजी) में दिये गए होते हैं, प्रश्न की भाषा सम्बन्धी किसी भी विवाद की स्थिति में अंग्रेजी भाषा में छपे प्रश्नों को वरीयता दी जाएगी। 
  • प्रारम्भिक परीक्षा की प्रकृति क्वालिफाइंग होती है। इसमें प्राप्त अंकों को मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।  
मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया:
  • प्रारम्भिक परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के लिये मुख्य परीक्षा का आयोजन राज्य के सात संभागों (जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा, बीकानेर, जोधपुर और उदयपुर) में आयोग द्वारा निर्धारित विभिन्न केन्द्रों पर किया जाता है। 
  • वर्ष 2013 में आर.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। पहले मुख्य परीक्षा में दो वैकल्पिक विषय होते थे, जिन्हें अब हटा दिया गया है। 
  • अब मुख्य परीक्षा में चार अनिवार्य प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र और ‘सामान्य हिंदी एवं सामान्य अंग्रेजी’ ) होते हैं, इसकी विस्तृत जानकारी ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गयी है। 
  • मुख्य परीक्षा की प्रकृति वर्णनात्मक/विश्लेषणात्मक होती है, इसमें संक्षिप्त, मध्यम और दीर्घ शब्द–सीमा वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। इन सभी प्रश्नों के उत्तर को आयोग द्वारा दी गयी उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित स्थान पर निर्धारित शब्दों में अधिकतम तीन घंटे की समय सीमा में लिखना होता है। 
  • नवीन संशोधनों के पश्चात आर.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा अब कुल 800 अंकों की होती है, जिसमें प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिये अधिकतम 200-200 अंक निर्धारित किये गए। 
  • परीक्षा के इस चरण में सफलता प्राप्त करने के लिये सामान्यत: 60-65% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। 
  • पूर्व की भाँति ही इन प्रश्नपत्रों में प्राप्त किये गए अंक मेधा सूची में जोड़े जाएंगे। 
  • परीक्षा के सभी विषयों में कम से कम शब्दों में की गई संगठित, सूक्ष्म और सशक्त अभिव्यक्ति को श्रेय मिलेगा। 
साक्षात्कार की प्रक्रिया: 
मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: एक माह पश्चात आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।  साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर म...
  • मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: एक माह पश्चात आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है। 
  • साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है। यह प्रक्रिया अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार एक से अधिक दिनों तक चलती है। 
  • आर.पी.एस.सी. की इस परीक्षा में साक्षात्कार के लिये कुल 100 अंक निर्धारित किये गये हैं।  
  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है।    
  • सम्पूर्ण साक्षात्कार समाप्त होने के सामान्यत: एक सप्ताह पश्चात अन्तिम रुप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाती है।

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